पटना हाई कोर्ट का सख्त रुख: बेगूसराय ‘रिंकू केस’ की जांच अब IG विकास वैभव के हवाले, पुलिस थ्योरी पर उठे सवाल
पटना: पटना हाई कोर्ट ने बेगूसराय के चर्चित रिंकू कुमारी संदिग्ध मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्थानीय पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट ने इस केस की दोबारा जांच (Re-investigation) के आदेश देते हुए इसकी जिम्मेदारी बिहार पुलिस के IG विकास वैभव को सौंप दी है।
🔎 पुलिस की जांच पर कोर्ट की नाराजगी
जस्टिस संदीप कुमार ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने मामले को सही दिशा में जांचने के बजाय इसे आत्महत्या बताकर जल्दबाजी में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि निष्पक्ष जांच हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
⚖️ 15 लाख रुपये और मौत का कनेक्शन
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में बताया गया कि रिंकू कुमारी ने जमीन खरीदने के लिए दो लोगों को करीब 15 लाख रुपये एडवांस दिए थे। जब पैसे वापस करने को लेकर विवाद बढ़ा, तो 4 अप्रैल 2021 को रकम लौटाने की बात हुई। उसी दिन रिंकू स्कूल के लिए निकलीं और बाद में उनका शव संदिग्ध हालत में मिला।
❗ शव की हालत से उठे सवाल
मृतका का शव स्कूल परिसर में जिस हालत में मिला, उसने पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी पर सवाल खड़े कर दिए। शरीर पर धूल-मिट्टी और गले में फंदा—इन परिस्थितियों को लेकर परिजनों ने शुरू से ही हत्या की आशंका जताई थी।
🚨 अब SIT करेगी नई जांच
कोर्ट ने अब इस केस को बेगूसराय पुलिस से हटाकर IG विकास वैभव के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाने का निर्देश दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि नई टीम इस मामले की हर परत खोलकर सच सामने लाएगी।
⏳ 5 साल बाद न्याय की उम्मीद
करीब पांच साल से न्याय की लड़ाई लड़ रही रिंकू की बेटी के लिए यह फैसला राहत की बड़ी खबर है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई जांच में क्या सच सामने आता है और क्या दोषियों तक कानून का हाथ पहुंचता है।
👉 कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक संदिग्ध मौत का नहीं, बल्कि पुलिस जांच प्रणाली पर भी बड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि नई जांच कितनी पारदर्शी और प्रभावी साबित होती है।
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